जाने किस ख़ासियत के चलते गाय और भैंस के दूध से भी महंगा है गधी का दूध, पुराने जमाने में रानियाँ ख़ास काम करने के लिए करती थी इस्तेमाल

कुछ समय पहले खबरें आईं थीं कि गुजरात में हलारी नस्ल के गधों का दूध काफी लोकप्रिय हो रहा है. हलारी गधों की खास नस्ल सौराष्ट्र में ही पाई जाती है. ये जामनगर और द्वारिका में मिलते हैं. वहीं इनकी डेयरी भी खुल रही हैं. इन गधों का इस्तेमाल पहले सामान लाने ले जाने के लिए ही होता था लेकिन बाद में इसका दूध निकालने का काम शुरू हुआ. एक खास समुदाय इन्हें पालता है. और दूध निकालता है. 

 

कुछ समय पहले खबरें आईं थीं कि गुजरात में हलारी नस्ल के गधों का दूध काफी लोकप्रिय हो रहा है. हलारी गधों की खास नस्ल सौराष्ट्र में ही पाई जाती है. ये जामनगर और द्वारिका में मिलते हैं. वहीं इनकी डेयरी भी खुल रही हैं. इन गधों का इस्तेमाल पहले सामान लाने ले जाने के लिए ही होता था लेकिन बाद में इसका दूध निकालने का काम शुरू हुआ. एक खास समुदाय इन्हें पालता है. और दूध निकालता है. 

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हलारी नस्ल (Halari) के गधे सफेद रंग के होते हैं. इनकी कद काठी मजबूत और सामान्य होती है. हरियाणा के करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु अनुवांशिक संसाधन ब्यूरो ने भी इन पर रिसर्च करके इन्हें खास नस्ल का बताया है. 

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अगर स्वास्थ्य के लिहाज से देखा जाए तो गधी का दूध आंतों का संक्रमण कम करता है, सिरदर्द के लिए बेहतर है. इसमें लैक्टोज इंटोलेरंट्स होता है. ये ऑस्टियोपोरोसिस के लिए उपयोगी है और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है. बाल और सौंदर्य के लिए फायदेमंद है.
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दुनियाभर के कई देशों में गधी का दूर सौंदर्य उत्पादों और त्वचा के निखार में इस्तेमाल में लाए जाने वाले उत्पादों में इस्तेमाल हो रहा है. यहां तक कि आयुर्वेद में भी त्वचा के रोगों के लिए गधी के दूध को बेहतर बताया गया है. कहा जा सकता है कि गधी का दूध प्राकृतिक मॉइश्चराइजर का काम करता है और त्वचा को चमक देता है. ये एंटी एजिंग यानि बढ़ती उम्र के परिणाम कम करता है. प्राकृतिक त्वचा को कोमल, स्वस्थ और चमकदार बनाता है. ये प्रोटीन का अच्छा स्रोत भी है. 


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मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा को दुनिया की सबसे हसीन महिलाओं में माना जाता है. उनके बारे में कई किस्सों से एक ये भी है कि वो खूबसूरती बरकरार रखने के लिए गधी के दूध से नहाती थीं. वैसे क्लियोपेट्रा की बात सच हो या न हो लेकिन ये साबित हो चुका है कि गधी का दूध त्वचा के लिए शानदार  है.

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ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने साल 2014 में ये कहकर चर्चा में आ गए थे कि उन्होंने छुटपन में गधी का दूध भी पिया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पोप ने बताया था कि अर्जेंटीना में अपने बचपन में मां के दूध के विकल्प के तौर पर उन्हें गधी का दूध भी दिया गया था, जो काफी सेहतमंद था. वैसे गधी के दूध में हाल के समय में कई बातें आ रही हैं. खुद एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये दूध काफी पौष्टिक ही नहीं, बल्कि स्किन केयर के लिए लाजवाब होता है. 

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भारत में भी गधी के दूध से बने ब्यूटी प्रोडक्ट की मांग बढ़ी है. इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक Dolphin IBA नाम की एक कंपनी देश के कोने-कोने में गधी के दूध से बने ब्यूटी प्रोडक्ट बेचती है. एंटी-एजिंग प्रोडक्ट के तौर पर इसकी काफी मांग है.

यहां तक कि यूएन के फूड एंड एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट का भी मानना है कि गधी के दूध में कई फायदे होते हैं. यहां तक कि ब्यूटी प्रोडक्ट के अलावा खाने में भी ये काफी फायदेमंद है. खासकर वे लोग, जिन्हें गाय या भैंस के दूध से एलर्जी होती है, वे गधी के दूध से बने प्रोडक्ट ले सकते हैं.

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गधी से दूध से दुनिया का सबसे महंगा पनीर बनता है. उत्तरी सर्बिया में बनने वाले इस पनीर के एक किलो की कीमत लगभग 70 हजार रुपए तक जाती है. इसे बनाने वाले स्लोबोदान सिमिक की मानें तो ये पनीर न केवल लज़ीज़ होता है बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी बेहतर विकल्प है.

ये पनीर 2012 में तब चर्चा में आया था, जब सर्बिया के टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच के बारे में कहा गया था कि उनके लिए इस पनीर की सालाना सप्लाई की जाती है, हालांकि नोवाक ने इस खबर का खंडन किया था.