दुनिया की इस धूल की कीमत के आगे तो सोना चांदी भी है फीके, कीमत सुनकर तो पैरो तले से खिसक जाएगी जमीन

आपने वो कहावत तो सुनी होगी सारी मेहनत धूल में मिल गई। धूल को हमेशा ही बिना कीमत की चीज़ माना जाता रहा है लेकिन आज हम आपको धूल की भी कीमत बताएंगे। ऐसा नहीं है कि धूल हमेशा बेकार और बेदाम ही होती है...
 

आपने वो कहावत तो सुनी होगी सारी मेहनत धूल में मिल गई। धूल को हमेशा ही बिना कीमत की चीज़ माना जाता रहा है लेकिन आज हम आपको धूल की भी कीमत बताएंगे। ऐसा नहीं है कि धूल हमेशा बेकार और बेदाम ही होती है, कई बार धूल की कीमत करोड़ों में लग जाती है।

बस मैटर ये करता है कि धूल आई कहां से है। आपने कभी सोचा है कि क्या धूल भी कीमती हो सकती है? इसके जवाब में आप शायद कनफ्यूज़ हो जाएंगे लेकिन आपको आज हम उस जगह के बारे में बताएंगे, जहां की एक चुटकी धूल करोड़ों में बिक चुकी है।

ये धूल हमारी धरती की नहीं बल्कि उसके उपग्रह चंद्रमा से आई हुई थी। जब बात चंद्रमा की धूल की आती है, तो इसका महत्व और कीमत अकल्पनीय हो जाती है। एक ऐसी धूल जिसका मूल्य करोड़ों में है, इसे समझना आम लोगों के लिए चकित करने वाला है।

चंद्रमा से आई धूल का मूल्य

इतिहास में पहली बार चंद्रमा से लाई गई धूल ने बोनहैम्स में नीलामी में बड़ी कीमत पाई। अपोलो 11 मिशन द्वारा लाई गई इस धूल को 4 करोड़ 16 लाख 71 हज़ार 400 रुपये में बेचा गया, जिसने यह साबित कर दिया कि धूल की कीमत उसके आने के स्थान पर निर्भर करती है।

चंद्रमा से धरती तक धूल की यात्रा

अपोलो 11 मिशन के दौरान नील आर्मस्ट्रांग द्वारा लाई गई इस चुटकी भर धूल ने न केवल वैज्ञानिक महत्व रखा बल्कि यह संग्रहकर्ताओं के लिए एक दुर्लभ वस्तु बन गई। इस धूल का नीलामी में बिकना यह दर्शाता है कि मानव जाति के लिए अंतरिक्ष का अन्वेषण कितना महत्वपूर्ण है।

दुनिया में केवल तीन देशों के पास चांद की धूल

अमेरिका, रूस और चीन - ये तीन देश ऐसे हैं जिनके पास चांद की धूल है। इससे यह पता चलता है कि चांद की धूल कितनी दुर्लभ और महत्वपूर्ण है। अमेरिका के पास तो चंद्रमा की चट्टान के नमूने भी हैं, जो अंतरिक्ष विज्ञान और अन्वेषण के क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाते हैं।