डेयरी फार्मिंग से हरियाणा का किसान बना करोड़पति, मशहूर कंपनियो को दूध बेचकर हर महीने कमाता है 20 लाख रुपए

गुरमेश उर्फ डिंपल दहिया जिन्होंने कक्षा 8 के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी आज वे डेयरी फार्मिंग के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं.
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dairy farming: गुरमेश उर्फ डिंपल दहिया जिन्होंने कक्षा 8 के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी आज वे डेयरी फार्मिंग के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं. करनाल जिले के गुढ़ा गांव के रहने वाले गुरमेश ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल अपने आलोचकों को गलत साबित किया है, बल्कि आज उनकी गिनती करोड़पति व्यक्तियों में की जाती है.

डेयरी फार्मिंग में खासियत

गुरमेश ने 2004 में मात्र 10 गायों से अपनी डेयरी की शुरुआत की थी. आज उनकी डेयरी में 60 गाय हैं और प्रतिदिन 1,500 लीटर दूध का उत्पादन होता है. उनके दूध की खरीदारी बड़ी कंपनियां जैसे कि नेस्ले और अमूल (Amul and Nestle Dairy Products) करती हैं जिससे वे हर महीने 15 से 20 लाख रुपये कमा रहे हैं.

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डेयरी फार्मिंग का विचार कैसे आया?

गुरमेश के पिता रणधीर सिंह पहले पशुपालन का काम करते थे. उन्होंने 2004 में डेयरी फार्मिंग को विस्तार देते हुए एक नई ब्रीडिंग प्रक्रिया अपनाई. गुरमेश ने विदेशी नस्लों की गायों का चयन करना शुरू किया और उन्हें अपने फार्म में शामिल किया. उनका लक्ष्य अपनी डेयरी को और अधिक व्यवसायिक रूप देना था.

गायों की नस्ल और दूध उत्पादन में विशेषज्ञता

गुरमेश की डेयरी में आज विभिन्न प्रकार की गायें हैं जिनमें से कुछ 40 से 60 लीटर तक दूध देती हैं. उनकी एक गाय तो 67 लीटर दूध देती है जिसे खरीदने के लिए लोग 5 लाख रुपये देने को तैयार हैं. गुरमेश इन गायों को दुग्ध प्रतियोगिताओं (Dairy Competitions) के लिए तैयार कर रहे हैं.

ब्रीडिंग और आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग

गुरमेश ने बताया कि वह ब्रीडिंग के लिए विदेशी कंपनियों के सीमन का इस्तेमाल करते हैं. वे अमेरिका, नीदरलैंड, कनाडा और गुजरात से सीमन आयात करते हैं. ये सीमन उन्हें 1,000 से 7,000 रुपये के बीच में पड़ता है जो कि उनके फार्म की प्रोडक्टिविटी और दूध की क्वालिटी को बढ़ाता है.

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