home page

नोएडा से कानपुर की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए बनेगा 380KM लंबा एक्सप्रेसवे, यूपी के इन जिलों की हो जाएगी मौज

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के लिए नए एक्सप्रेसवे और हाईवे परियोजनाओं पर निरंतर कार्य किया है।
 | 
noida-kanpur-expressway
   

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के लिए नए एक्सप्रेसवे और हाईवे परियोजनाओं पर निरंतर कार्य किया है। इसी कड़ी में दिल्ली से सटे नोएडा को कानपुर से जोड़ने के लिए एक नए एक्सप्रेसवे की योजना बनाई गई है जिससे दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय कम होगा और व्यापारिक संबंधों को भी बल मिलेगा।

प्रोजेक्ट का आरंभ और महत्व

इस नए एक्सप्रेसवे का निर्माण हापुड़ से जोड़ने के लिए 60 किलोमीटर लंबी कनेक्टर रोड के साथ किया जाएगा। यह परियोजना न सिर्फ यातायात को आसान करेगी बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। नोएडा-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण कानपुर से कन्नौज तक जीडी रोड के ऊपर किया जाएगा जिसकी कुल लंबाई 380 किलोमीटर होगी।

एक्सप्रेसवे की विशेषताएँ और लाभ

इस एक्सप्रेसवे की खासियत यह है कि यह एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है जो बुलंदशहर, कासगंज, एटा, मैनपुरी और कन्नौज होते हुए कानपुर तक जाएगा। यह एक्सप्रेसवे अलीगढ़ होते हुए नोएडा तक बनाया जाएगा और यह ग्रेटर नोएडा के सिरसा में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा। इसके अलावा, यह एक्सप्रेसवे विभिन्न शहरों के बीच व्यापारिक संचार को भी आसान बनाएगा जिससे क्षेत्रीय विकास में तेजी आएगी।

हमारा Whatsapp ग्रूप जॉइन करें Join Now

विकास और अर्थव्यवस्था पर असर

इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से संबंधित शहरों में व्यापार और उद्योग की संभावनाएँ बढ़ेंगी। सड़क के नेटवर्क का सुधार न केवल परिवहन लागत को कम करेगा बल्कि स्थानीय बाजारों को भी मजबूती मिलेगी। इसके अतिरिक्त नए एक्सप्रेसवे का निर्माण स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास में तेजी आएगी।

चुनौतियाँ और आगे की रणनीति

परियोजना के निष्पादन में कई चुनौतियाँ भी सामने आएँगी, जैसे कि भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी। सरकार को इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए स्थानीय समुदायों और पर्यावरणीय संगठनों के साथ समन्वय बनाना होगा। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक परामर्श और शासन की पारदर्शिता महत्वपूर्ण होंगी, ताकि परियोजना के दौरान और बाद में किसी भी प्रकार की समस्या से बचा जा सके।