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बेटी के जवान होते ही पिता अपनी बेटी को बना लेता है दुल्हन, मां भी नही कर पाती कोई ऐतराज

दुनिया भर के देश अपनी-अपनी संस्कृतियों और परंपराओं के लिए जाने जाते हैं। हर देश में अनेक समुदाय और जनजातियां मौजूद हैं जिनकी अपनी खास परंपराएं और मान्यताएं होती हैं।
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दुनिया भर के देश अपनी-अपनी संस्कृतियों और परंपराओं के लिए जाने जाते हैं। हर देश में अनेक समुदाय और जनजातियां मौजूद हैं जिनकी अपनी खास परंपराएं और मान्यताएं होती हैं। जहां ये परंपराएं उनके लिए सम्मान का विषय होती हैं वहीं दूसरे देशों के लोगों के लिए ये कभी-कभी अजीबोगरीब लग सकती हैं।

अनोखी परंपरा का सच

बांग्लादेश की मंडी जनजाति में प्रचलित एक परंपरा ने सभी को चौंका दिया है। इस जनजाति में एक ऐसी परंपरा है जहां एक पिता अपनी बेटी से विवाह कर उसका पति बन जाता है। यह सुनने में भले ही अजीब लगे पर वहां की संस्कृति में यह एक अजीब प्रथा है।

परंपरा के पीछे की वजह

इस परंपरा के पीछे की वजह यह है कि अगर कोई पुरुष कम उम्र में किसी विधवा महिला से विवाह करता है तो यह तय हो जाता है कि वह भविष्य में उस महिला की पहली शादी से हुई बेटी से विवाह करेगा। यहां यह महत्वपूर्ण है कि वह अपनी और उस महिला की संयुक्त संतान से नहीं बल्कि महिला की पहली शादी से हुई बेटी से विवाह करता है। इस परंपरा को समझना बाहरी दुनिया के लिए एक चुनौती है और इसकी काफी आलोचना भी होती है।

महिलाओं की आपबीती

इस परंपरा के अंतर्गत कई महिलाओं ने अपने अनुभव शेयर किए हैं। उनकी कहानियां इस प्रथा की वास्तविकता को उजागर करती हैं। ऐसी ही एक कहानी ओरोला की है जिसे मैरी क्लेयर ने प्रकाशित किया था। ओरोला ने बताया कि कैसे उसकी मां ने विधवा होने के बाद दूसरी शादी की और शर्त के अनुसार ओरोला को भी अपने सौतेले पिता से विवाह करना पड़ा। यह कहानी समाज में इस प्रथा के प्रभाव और परिणामों को दर्शाती है।

समाज में बदलाव की आवश्यकता

इस प्रकार की परंपराएं जो कि आधुनिक समाज की मान्यताओं से विरोधाभासी होती हैं उन पर पुनर्विचार की जरूरत है। जहां ये परंपराएं किसी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हो सकती हैं वहीं इनसे जुड़े नैतिक और सामाजिक प्रश्नों को उठाना भी जरूरी है। समाज में बदलाव लाने के लिए ऐसी प्रथाओं की समीक्षा और चर्चा महत्वपूर्ण है।