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Bharat Chawal Price: बढ़ती महंगाई को लेकर मोदी सरकार ने लोगों को दी बड़ी राहत, अब 29 रुपए प्रति किलो के हिसाब से मिलेगा भारत चावल

भारतीय बाजार में पिछले एक साल में चावल (Rice) की खुदरा कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। इस बढ़ोतरी के चलते, आम उपभोक्ता (Consumers) की जेब पर काफी असर पड़ा है। इस स्थिति के मद्देनजर, भारत सरकार...
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Rice29 RupeeKG, Pm Modi

भारतीय बाजार में पिछले एक साल में चावल (Rice) की खुदरा कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। इस बढ़ोतरी के चलते, आम उपभोक्ता (Consumers) की जेब पर काफी असर पड़ा है। इस स्थिति के मद्देनजर, भारत सरकार (Government of India) ने उपभोक्ताओं को रियायती दरों (Subsidized Rates) पर चावल उपलब्ध कराने की पहल शुरू की है।

"भारत चावल" योजना न केवल मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए एक कदम है बल्कि यह आम आदमी को राहत पहुंचाने का भी एक माध्यम है। इस योजना से उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण चावल (Quality Rice) प्राप्त होगा, जिससे उनके खाने की थाली में राहत मिलेगी और साथ ही साथ मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

"भारत चावल" की शुरुआत

इस पहल के तहत, सरकार ने "भारत चावल" (Bharat Rice) नाम से एक नया ब्रांड लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से चावल को मात्र 29 रुपये प्रति किलोग्राम (29 INR per Kg) की दर पर बेचा जाएगा। यह चावल 5 किलो और 10 किलो (5 Kg and 10 Kg Packs) के पैक में उपलब्ध कराया जाएगा, जो कि पिछले एक साल में 15% से अधिक वृद्धि के बाद उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत होगी।

खाद्य मंत्री की भूमिका और आशा

खाद्य मंत्री पीयूष गोयल (Food Minister Piyush Goyal) ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) के सहयोग से इस योजना को लागू किया है। यह योजना भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा समर्थित है, जिससे 5 लाख टन चावल का पहला चरण (Phase-1) शुरू किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि "भारत चावल" के लिए भी वही सकारात्मक प्रतिक्रिया (Positive Response) मिलेगी जैसी "भारत आटा" और "भारत चना" को मिली है।

मुद्रास्फीति और सरकारी उपाय

भारत में मुद्रास्फीति (Inflation) की दर में वृद्धि एक चिंता का विषय रही है, खासकर खाद्य पदार्थों के मामले में। निर्यात पर प्रतिबंध (Export Ban) और बंपर उत्पादन के बावजूद, खुदरा कीमतें नियंत्रण में नहीं आ पा रही हैं। इस स्थिति में सरकार ने जमाखोरी (Hoarding) को रोकने के लिए विभिन्न उपाय सुझाए हैं।