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सरकारी स्कूलों में बच्चों को 2 घंटा खेलने की मिली परमिसन, जारी हुए नए ऑर्डर

स्कूली शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। इसी सोच के साथ हमारे स्थानीय सरकारी स्कूलों ने एक नई पहल की शुरुआत की है।
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स्कूली शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। इसी सोच के साथ हमारे स्थानीय सरकारी स्कूलों ने एक नई पहल की शुरुआत की है। इस पहल के अंतर्गत सभी स्कूलों में बच्चों को प्रतिदिन दो घंटे खेलने की आज़ादी दी गई है। यह निर्णय ध्यान मे रखते हुए लिया गया है जहां शहरी विस्तार के कारण खेलने के लिए मैदान कम होते जा रहे हैं।

खेलने की नई सुविधाएँ और सावधानियां

शिक्षा विभाग ने यह व्यवस्था की है कि अब कोई भी बच्चा स्कूल के मैदानों में बिना किसी प्रशिक्षण या कोच के सहारे खेल सकता है। इसके अलावा विभाग ने सख्ती से यह भी आदेश दिया है कि किसी भी सरकारी स्कूल में प्राइवेट स्पोर्ट्स अकादमी का संचालन नहीं किया जा सकेगा। अगर किसी स्कूल में इस तरह की कोई गतिविधि पाई जाती है तो संबंधित प्रिंसिपल पर कार्रवाई की जाएगी।

माता-पिता की भूमिका और अनुमति

बच्चों के माता-पिता जो चाहते हैं कि उनके बच्चे शाम 5 से 7 बजे तक स्कूल में खेलें उन्हें स्थानीय पार्षद और रेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन की ओर से जारी एक पत्र स्कूल के प्रिंसीपल को दिखाना होगा। इस प्रक्रिया में सावधानी और सुविधा के लिए विशेष नियम भी बनाए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की समस्या से बचा जा सके।

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ग्रीन पार्क में उत्पन्न समस्याएँ

पहले ग्रीन पार्क में खेलते समय बच्चे अक्सर सीनियर सिटीजन्स से टकरा जाते थे जिससे चोटिल होने की समस्याएं उत्पन्न होती थीं। इस कारण से विभिन्न शिकायतों के बाद यह व्यवस्था की गई कि बच्चों को स्कूलों में खेलने की अनुमति दी जाए। इससे न केवल सीनियर सिटीजन्स की सुरक्षा सुनिश्चित होती है बल्कि बच्चों को भी खेलने के लिए उचित स्थान मिल जाता है।