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पराली मैनेजमेंट को लेकर 20 हजार किसानों के करोड़ों रुपए अटके, अधिकारियों ने बताया ये कारण

कैथल जिला, जो पराली प्रबंधन में प्रदेश भर में पहले स्थान पर है, आज भी अपने लगभग 20 हजार किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इन किसानों के लिए आवंटित 20 करोड़ रुपये (Funds) अभी भी अटके हुए हैं।
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कैथल जिला, जो पराली प्रबंधन में प्रदेश भर में पहले स्थान पर है, आज भी अपने लगभग 20 हजार किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इन किसानों के लिए आवंटित 20 करोड़ रुपये (Funds) अभी भी अटके हुए हैं। इस स्थिति का मुख्य कारण यह है कि प्रत्येक किसान के पास एक यूनिक कोड (Unique Code) होता है।

जिसे चेक करने और पूरी तरह से वेरिफाई (Verify) करने के बाद ही आगे की प्रोसेस शुरू की जा सकती है। हालांकि विभाग के कर्मचारी इस काम में लगातार लगे हुए हैं, लेकिन फिर भी बड़ी मात्रा में किसान प्रोत्साहन राशि (Incentive Amount) से वंचित हैं।

प्रोत्साहन राशि की प्रक्रिया में बाधाएं

इस प्रोसेस में एक और बड़ी समस्या यह है कि बहुत से फार्म पर लोकल विलेज कमेटी (Local Village Committee) के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं, जिससे वेरिफिकेशन प्रोसेस में दिक्कत आ रही है। हरियाणा सरकार (Haryana Government) पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देती है।

कैथल जिले में ऐसे 25 हजार किसान हैं, जिन्होंने पराली प्रबंधन के बाद प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन किया था, जिनके खातों में कुल 25 करोड़ रुपये (Total Amount) आने थे। लेकिन अभी तक सिर्फ 5 हजार किसान ही ऐसे हैं, जिन्हें यह प्रोत्साहन राशी प्राप्त हुई है, जबकि शेष 20 हजार किसान अभी भी इसके लिए इंतजार में हैं।

आवेदन प्रक्रिया और वेरिफिकेशन

किसानों को इस प्रोत्साहन राशि के लिए सबसे पहले एक ऑनलाइन पोर्टल (Online Portal) के माध्यम से आवेदन करना होता है। इसके बाद, लोकल विलेज कमेटी द्वारा इसकी वेरिफिकेशन की जाती है, जिसमें गांव का नंबरदार, एक कृषि विभाग का कर्मचारी और एक पटवारी शामिल होते हैं।

वेरिफिकेशन के बाद, कमेटी फाइल को डीडीए एग्रीकल्चर (DDA Agriculture) को भेजती है, जहां सहायक कृषि अभियंता डॉ. जगदीश मलिक डीसी से पेमेंट की अप्रूवल लेते हैं। इसके बाद ही किसान के खाते में प्रोत्साहन राशि डाली जाती है।

आगे की राह

यह मुद्दा न केवल कैथल जिले के किसानों के लिए बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक गंभीर समस्या को दर्शाता है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार और संबंधित विभागों को अधिक सक्रियता और पारदर्शिता (Transparency) के साथ काम करने की आवश्यकता है।

किसानों की सहायता के लिए आवेदन प्रक्रिया को अधिक सरल और त्वरित बनाने की दिशा में काम करना होगा, ताकि वे समय पर अपनी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त कर सकें। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है।