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धर्मेंद्र की ठुकराई इस फिल्म ने सनी देओल को बना दिया था सुपरस्टार, 1988 में फिल्म ने कमाई में तोड़े पुराने रिकोर्ड

बॉलीवुड का वो युग जब सत्तर और अस्सी के दशक में धर्मेंद्र का नाम ही फिल्मों की सफलता का प्रतीक बन चुका था एक ऐसा दौर था जिसे फिल्म इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।
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बॉलीवुड का वो युग जब सत्तर और अस्सी के दशक में धर्मेंद्र का नाम ही फिल्मों की सफलता का प्रतीक बन चुका था एक ऐसा दौर था जिसे फिल्म इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। 'आग ही आग' जैसी फिल्मों की शानदार सफलता के बाद फिल्म निर्देशक शिबू मित्रा ने धर्मेंद्र के साथ अपने आगामी प्रोजेक्ट के लिए फिर से हाथ मिलाने की योजना बनाई।

धर्मेंद्र की अनोखी शर्तें

जब शिबू मित्रा और प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी ने धर्मेंद्र को अपनी नई फिल्म 'पाप की दुनिया' का प्रस्ताव दिया, तो धर्मेंद्र ने एक असामान्य शर्त के साथ उन्हें चौंका दिया। धर्मेंद्र ने स्पष्ट किया कि वे इस फिल्म का हिस्सा तभी बनेंगे, अगर निर्देशक उनके स्थान पर उनके पुत्र सनी देओल को मुख्य भूमिका में कास्ट करें। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एक और शर्त रखी कि अगर उनकी इस बात को मान लिया जाता है, तो वे निर्देशक की अगली फिल्म को आधी फीस में करने को तैयार होंगे।

शर्तों का सही परिणाम

धर्मेंद्र की इन शर्तों ने शुरुआत में तो शिबू मित्रा को निराश कर दिया लेकिन जल्द ही उन्हें इसमें छिपे अवसर का अहसास हुआ। 'पाप की दुनिया' जो कि 'परवरिश' फिल्म की रीमेक थी में सनी देओल की कास्टिंग ने फिल्म को एक नया रूप दिया। इस फिल्म में सनी देओल के साथ प्राण, नीलम कोठारी, चंकी पांडे और डैनी जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं।

'पाप की दुनिया' की शानदार सफलता

'पाप की दुनिया' का निर्माण 2.40 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था और इसने बॉक्स ऑफिस पर 9 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड तोड़ कमाई की। यह उस वर्ष की तीसरी सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बन गई। धर्मेंद्र की यह दूरदर्शी शर्त न केवल उनके पुत्र सनी देओल के लिए बॉलीवुड में एक मजबूत आधार तैयार करने में सहायक सिद्ध हुई बल्कि यह फिल्म उद्योग में एक नई प्रवृत्ति की शुरुआत भी कर गई।

एक पिता की सोच ने बदली फिल्मी दुनिया

धर्मेंद्र की इस पहल ने न केवल सनी देओल के करियर को एक नई उड़ान दी बल्कि यह भविष्य के सिनेमा में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित करती है। इसने यह भी सिद्ध किया कि बॉलीवुड में प्रतिभाओं को उचित मौका देने के लिए किसी भी स्थापित सितारे की ओर से उठाया गया कदम कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। 'पाप की दुनिया' की सफलता ने न केवल शिबू मित्रा को खुशी दी बल्कि बॉलीवुड के इतिहास में एक यादगार पल के रूप में अपनी छाप छोड़ी।