सरसों तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी, गरीब परिवारों को इतने रूपए लीटर मिलेगा सरसों तेल
जिला मुख्यालयों को जारी किया गया नया नोटिफिकेशन
सरकार की ओर से सभी जिला मुख्यालयों को इस बदलाव संबंधी नोटिफिकेशन भेजा गया है। राशन डिपो पर मिलने वाले सरसों के तेल की यह नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू की जाएंगी। इस नए आदेश के बाद डिपो संचालकों और लाभार्थियों दोनों को नए सिस्टम के अनुसार सप्लाई और वितरण व्यवस्था को अनुकूलित करना होगा।
एक महीने पहले भी हुए थे रेट में बड़े बदलाव
गौरतलब है कि 1 जुलाई 2025 को ही सरकार ने सरसों के तेल के रेट में बड़ा बदलाव करते हुए 2 लीटर तेल 100 रुपए में देने के आदेश जारी किए थे। इससे पहले यह तेल 40 रुपए में मिलता था। इस अचानक बढ़े दाम का विरोध भी देखने को मिला था। खासकर ग्रामीण इलाकों और सीमित आय वाले परिवारों की ओर से।
रेट बढ़ने से गरीबों में नाराजगी, अब फिर बदलाव का निर्णय
जुलाई में बढ़े रेट पर लोगों ने सामाजिक मंचों, पंचायतों और स्थानीय अधिकारियों से शिकायतें की थीं। सरकार पर दबाव बढ़ने के बाद अब 1 लीटर सरसों तेल के लिए 30 रुपये की नई रियायती दर तय की गई है। हालांकि 2 लीटर तेल अब भी पहले की तरह 100 रुपये में ही मिलेगा। जिससे कई लोग इसे आधी राहत और आधी परेशानी के रूप में देख रहे हैं।
5 महीनों में 8.98 लाख कार्डधारकों के नाम हटाए गए
बीते 5 महीनों में राज्य सरकार ने BPL और AAY कार्डधारकों की सूची से 8.98 लाख नाम हटा दिए हैं। मार्च 2025 में प्रदेश में कुल 52.50 लाख गरीब परिवार थे, जिनकी संख्या अब घटकर 43.52 लाख रह गई है। यह बदलाव पुनः सत्यापन और नई पात्रता मानकों के तहत किया गया है। ऐसे में कई पुराने कार्डधारकों को राशन और अन्य सरकारी लाभों से वंचित होना पड़ा है।
सरकार के अनुसार बदलाव की वजह
खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरसों के तेल की कीमतों में लगातार हो रही बाजार अस्थिरता और बजट सीमाएं भी इस बदलाव की एक प्रमुख वजह हैं। सरकार को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण तेल उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो रहा था। इसलिए यह रेट संरचना दोबारा तय की गई ताकि बजट और जनहित दोनों का संतुलन बना रहे।
तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी समस्या का कारण
बाजार में सरसों तेल की कीमतों में पिछले कुछ महीनों से अस्थिरता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों से लेकर घरेलू उत्पादन तक कई कारणों से यह बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा समय-समय पर तेल की खरीद और वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास किए जाते हैं, ताकि गरीब परिवारों को न्यूनतम मूल्य पर खाद्य तेल उपलब्ध कराया जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई डिपो पर अनिश्चितता का माहौल
हालांकि सरकार ने नई दरें घोषित कर दी हैं, लेकिन कई ग्रामीण राशन डिपो पर तेल की आपूर्ति और वितरण को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है। डिपो संचालकों को नई कीमत पर स्टॉक प्राप्त नहीं हुआ है। जिसके चलते लाभार्थियों को इंतज़ार करना पड़ रहा है। वहीं, कई स्थानों पर पुरानी दरों पर ही तेल बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
लाभार्थियों को जागरूक करने की आवश्यकता
नए बदलावों के बीच यह भी जरूरी है कि लाभार्थियों को समय पर जानकारी दी जाए। कई बार लोगों को नई दरों या स्कीमों की जानकारी नहीं मिलती, जिससे भ्रम और असंतोष फैलता है। सरकार को ग्राम स्तर तक सूचना प्रचार, पंचायती राज संस्थाओं और डिपो स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।
क्या आगे और बदलाव संभव हैं?
सरकारी संकेतों से ऐसा लगता है कि यदि बाजार में तेल की कीमतें स्थिर नहीं रहीं, तो आने वाले समय में और बदलाव किए जा सकते हैं। सरकार को सब्सिडी, सप्लाई और मांग के संतुलन को बनाए रखते हुए स्थायी समाधान की दिशा में काम करना होगा। जिससे बार-बार रेट बदलने की जरूरत न पड़े।
