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इस सरकारी स्कूल में बच्चो को मिलती है प्राइवेट स्कूल जैसी सुविधाएं, पढ़ाने का तरीका देख लेंगे तो आप भी देंगे शाबाशी

अक्सर सुनने में आता है कि सरकारी स्कूल, प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सुविधाओं और शिक्षण की गुणवत्ता में पिछड़े होते हैं। लेकिन बांका जिले के अमरपुर प्रखंड स्थित प्रोन्नत मध्य विद्यालय कुलहरिया इस धारणा को गलत साबित...
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अक्सर सुनने में आता है कि सरकारी स्कूल, प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सुविधाओं और शिक्षण की गुणवत्ता में पिछड़े होते हैं। लेकिन बांका जिले के अमरपुर प्रखंड स्थित प्रोन्नत मध्य विद्यालय कुलहरिया इस धारणा को गलत साबित कर रहा है। यह स्कूल अपनी अद्वितीय सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है, जो किसी भी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं है।

यह विद्यालय न केवल बांका जिले के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। इसके प्रयास और उपलब्धियां दिखाती हैं कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो सरकारी स्कूल भी प्राइवेट स्कूलों की बराबरी कर सकते हैं। इस विद्यालय की कहानी हमें शिक्षा के प्रति एक नई सोच और दृष्टिकोण प्रदान करती है, जो सभी के लिए प्रेरणादायक है।

शिक्षा में क्रांति

इस स्कूल की स्थापना 1953 में हुई थी और तब से यह स्कूल निरंतर शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रधानाध्यापक मनोहर कुमार और उनकी टीम के प्रयासों से यह स्कूल अब उच्च माध्यमिक स्तर तक पहुँच चुका है। यहां के शिक्षक बच्चों को न केवल पढ़ाई में, बल्कि उनके समग्र विकास के लिए भी प्रेरित करते हैं।

बदलाव की दिशा में पहल

सहायक शिक्षिका सुरभि भारती का कहना है कि वह 2015 से इस विद्यालय में कार्यरत हैं और उन्होंने देखा है कि कैसे स्कूल का माहौल पूरी तरह से बदल गया है। पहले जहाँ बच्चों की उपस्थिति कम थी, वहीं अब स्कूल में 600 से ज्यादा बच्चे रोजाना पढ़ाई के लिए आते हैं।

स्मार्ट क्लास और अधिक

विद्यालय में आधुनिक सुविधाएं जैसे स्मार्ट क्लास, वॉल प्रिंटिंग, बागवानी और खेल के मैदान उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं ने बच्चों को न केवल पढ़ाई के प्रति उत्साहित किया है बल्कि उनके आत्मविश्वास और कौशल में भी वृद्धि की है।

सम्मान और प्रशंसा

स्कूल की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। पूर्व प्रधानाध्यापक पप्पू हरिजन को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित किया गया है। इससे स्कूल के शिक्षकों और छात्रों को और अधिक प्रेरणा मिली है।