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पंजाब के इस मैन हाइवे पर लोगों ने लगाया पक्का धरना, घर से निकलने से पहले जान ले पूरे रूट

मुशकाबाद, खिरनियां और टपरिया गांवों के निवासियों ने पास के गांव मुशकाबाद में स्थापित किए जा रहे बायोगैस प्लांट के खिलाफ अपने संघर्ष को नया आयाम दिया है। इस संघर्ष में आसपास के अन्य गांव भी उनके साथ आ गए हैं...
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मुशकाबाद, खिरनियां और टपरिया गांवों के निवासियों ने पास के गांव मुशकाबाद में स्थापित किए जा रहे बायोगैस प्लांट के खिलाफ अपने संघर्ष को नया आयाम दिया है। इस संघर्ष में आसपास के अन्य गांव भी उनके साथ आ गए हैं, जिससे यह मुद्दा और भी बड़ा हो गया है।

इस पूरे प्रकरण में ग्रामीणों का यह संघर्ष सिर्फ एक बायोगैस प्लांट के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक बड़ी लड़ाई है। वे चाहते हैं कि औद्योगिक प्रगति के नाम पर उनके जीवन को खतरे में न डाला जाए।

गाँव वाला का विरोध प्रदर्शन

गांवों के निवासियों ने हाल ही में 'साडे घर ते साडे पिंड विकाऊ' के पोस्टर लगाकर अपने विरोध की गंभीरता को दर्शाया है। दो साल से अधिक समय से यह संघर्ष चल रहा है, लेकिन अब समाधान न मिलने पर लोगों ने लुधियाना-चंडीगढ़ हाईवे पर धरना देने का निर्णय लिया है।

प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं

ग्रामीणों का कहना है कि बायोगैस प्लांट से न केवल प्रदूषण बढ़ेगा बल्कि इलाके में बीमारियां भी फैलेंगी। इससे उनके जीवन को गंभीर खतरा होगा। इस प्रदर्शन में किसान समुदाय के साथ-साथ राजनीतिक नेता भी शामिल हुए हैं।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

मुस्काबाद गांव के सरपंच मालविंदर सिंह लवली ने प्रशासन पर झूठे आश्वासन देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया और फैक्ट्री का काम आगे बढ़ता रहा।

राजनीतिक समर्थन और आगे की रणनीति

इस धरने में पूर्व विधायक और अन्य राजनीतिक नेता भी शामिल हुए, जिन्होंने ग्रामीणों को समर्थन दिया और फैक्ट्री को बंद करने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने घोषणा की है कि जो राजनीतिक दल उनके मुद्दे का समर्थन करेंगे, उन्हें ही गांव में प्रवेश की अनुमति होगी।