home page

पेट्रोलियम कंपनियों ने हर महीने गैस सिलेंडर लेने की बनाई लिमिट, इस ज्यादा सिलेंडर खरीदे तो नही मिलेगी सब्सिडी

आजकल हर घर में रसोई गैस का उपयोग आम बात है। लेकिन जब बात आती है रसोई गैस सिलेंडर की सीमित उपलब्धता की तो यह कई परिवारों के लिए एक बड़ी समस्या बन जाती है। तेल कंपनियों द्वारा निर्धारित की गई नई....
 | 
lpg cylinder price
   

आजकल हर घर में रसोई गैस का उपयोग आम बात है। लेकिन जब बात आती है रसोई गैस सिलेंडर की सीमित उपलब्धता की तो यह कई परिवारों के लिए एक बड़ी समस्या बन जाती है। तेल कंपनियों द्वारा निर्धारित की गई नई व्यवस्था के अनुसार एक परिवार महीने में केवल दो सिलेंडर ही प्राप्त कर सकता है।

यदि उन्हें तीसरे सिलेंडर की आवश्यकता होती है, तो उन्हें पड़ोसियों के सामने हाथ फैलाना पड़ सकता है या बाजार से ब्लैक में सिलेंडर लेना पड़ेगा।

कोटे की मार

साल भर में केवल 12 नॉन-सब्सिडी सिलेंडर लिए जा सकते हैं यानी हर महीने एक सिलेंडर। अगर किसी परिवार को इससे ज्यादा की जरूरत होती है, तो उन्हें तीन अतिरिक्त सिलेंडर तो मिल सकते हैं, लेकिन बिना सब्सिडी के। इससे उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ और भी बढ़ जाता है।

व्यवहारिक समस्याएं

बड़े परिवार जिनमें सदस्यों की संख्या अधिक होती है, उन्हें हर महीने दो सिलेंडर की आवश्यकता होती है। त्योहारों और विवाह जैसे अवसरों पर तो खपत और भी बढ़ जाती है। ऐसे में उन्हें कम से कम दो कनेक्शन लेने की आवश्यकता पड़ती है, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त धनराशि भी खर्च करनी पड़ती है।

उपभोक्ताओं की आवाज

गोलघर के निवासी मंजीत श्रीवास्तव के परिवार में 24 सदस्य हैं, जिन्हें हर महीने दो सिलेंडर की जरूरत होती है। त्योहारों पर खपत बढ़ जाने के कारण उन्होंने महसूस किया कि इस व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता है।

नौसढ़ के निवासी शैलेश साहनी ने भी इस बात पर जोर दिया कि रसोई गैस सिलेंडर की उपलब्धता हर घर में होनी चाहिए, चाहे उसे कितनी भी जरूरत क्यों न हो।

समाधान की दिशा में

यह स्पष्ट है कि वर्तमान व्यवस्था में कुछ बदलावों की आवश्यकता है ताकि हर घर में रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इसके लिए सरकार और तेल कंपनियों को मिलकर कुछ कदम उठाने होंगे।

ताकि उपभोक्ताओं को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। व्यावहारिक समाधान की तलाश में यह आवश्यक है कि उपभोक्ताओं की आवाज को सुना जाए और उनकी जरूरतों के अनुसार नीतियों में बदलाव किए जाएं।