यूपी के इन लाखों कर्मचारियों से हर पैसे का हिसाब लेगी सरकार, सीएम योगी ने अधिकारियों को दिया आदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक नई व्यवस्था (New System) की शुरुआत की है, जिसके तहत सभी को अपनी चल और अचल संपत्ति (Movable and Immovable Property) का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) पर देना अनिवार्य होगा।
इस कदम को सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता (Transparency) और भ्रष्टाचार (Corruption) को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी संपत्ति के बारे में पारदर्शी होने के लिए प्रेरित करती है।
बल्कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम (Strong Step) भी है। मानव संपदा पोर्टल का इस्तेमाल करके, सरकार ने एक ऐसा मंच प्रदान किया है जो न केवल सुविधाजनक है बल्कि पूरी प्रक्रिया को और भी पारदर्शी बनाता है।
प्रमोशन पर रोक का निर्णय
मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र (Chief Secretary Durga Shankar Mishra) ने यह निर्देश जारी किया है कि जो कर्मचारी या अधिकारी 31 दिसंबर तक अपनी संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर नहीं देंगे।
उनकी पदोन्नति (Promotion) पर रोक लगाई जाएगी। यह एक जनवरी 2024 से लागू होगा, जिससे कर्मचारियों को समय रहते अपनी जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
मानव संपदा पोर्टल की भूमिका
पहली बार, राज्य सरकार ने मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) को इस प्रक्रिया के लिए चुना है। इस पोर्टल पर सभी कर्मचारियों और अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन (Online) उपलब्ध होगा।
जो कि पारदर्शिता को बढ़ावा देगा और संपत्ति के अवैध अधिग्रहण (Illegal Acquisition) और भ्रष्टाचार पर नजर रखने में मदद करेगा।
कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और आगे के कदम
सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से संपत्ति का ब्योरा मांगना नई बात नहीं है, लेकिन इसे मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) पर देने की अनिवार्यता ने इस प्रक्रिया को और अधिक संगठित और सुलभ (Accessible) बना दिया है। IAS और PCS अफसर पहले से ही अपनी संपत्ति का ब्योरा देते आ रहे हैं, लेकिन अब सभी कर्मचारियों को भी इस प्रक्रिया का पालन करना होगा।
भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में कदम
राज्य सरकार का यह कदम भ्रष्टाचार को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल (Important Initiative) है। मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का ब्योरा देने की अनिवार्यता से न केवल पारदर्शिता आएगी बल्कि इससे सरकारी सेवाओं में विश्वास और ईमानदारी (Trust and Integrity) को भी बढ़ावा मिलेगा।
