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बिना खर्ची और बिना पर्ची के नारे को खट्टर सरकार ने कर दिया साबित, इस गांव के 38 युवाओं का सरकारी महकमे में हुआ चयन

हरियाणा (Haryana) में मनोहर लाल सरकार (Manohar Lal Government) ने "योग्यता के आधार पर नौकरी" (Merit-Based Employment) के वादे को साकार करते हुए एक नई मिसाल कायम की है।
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Risaliakheda village did wonders

हरियाणा (Haryana) में मनोहर लाल सरकार (Manohar Lal Government) ने "योग्यता के आधार पर नौकरी" (Merit-Based Employment) के वादे को साकार करते हुए एक नई मिसाल कायम की है। हाल ही में हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (Haryana Staff Selection Commission) द्वारा ग्रुप सी (Group C) के परिणामों की घोषणा की गई।

जिसमें मंडी डबवाली के गांव रिसालियाखेड़ा (Risaliakheda) के 38 युवाओं का चयन हुआ। इस चयन ने न केवल गांव में खुशी (Happiness) की लहर दौड़ा दी है बल्कि पूरे हरियाणा में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

युवाओं की सफलता एक सपने की तरह

चयनित युवाओं का मानना है कि यदि "खर्ची-पर्ची" (Bribery) का चलन नहीं होता, तो उनका चयन कभी नहीं हो पाता। यह सफलता उनकी अथक मेहनत (Hard Work) और समर्पण का परिणाम है।

इस चयन से सिरसा जिले (Sirsa District) के रिसालियाखेड़ा गांव को एक नई पहचान मिली है, जिसे मुख्यमंत्री भी अपने भाषणों में उल्लेखित कर चुके हैं।

गांव के युवाओं की गरीबी और संघर्ष

ग्रुप सी के परिणामों ने यह साबित किया है कि सरकार ने जो वायदा किया था उसे निभाया है। गांव में चयनित 90 प्रतिशत युवा ऐसे हैं, जो गरीबी रेखा (Poverty Line) से नीचे जीवन यापन कर रहे थे।

उनके पास न तो सिफारिश (Recommendation) थी और न ही खर्ची के लिए साधन। ऐसे में उनका सरकारी नौकरी पाना गांव के लिए एक गर्व की बात है।

रिसालियाखेड़ा के युवाओं की मेहनत और लगन

चयनित युवाओं ने अपनी सफलता के लिए सुबह, शाम और रात को मन लगाकर पढ़ाई (Study) की। ऑनलाइन क्लासेज (Online Classes) और लाइब्रेरी (Library) का उनकी सफलता में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस सफलता से साबित होता है कि यदि मेहनत और लगन से पढ़ाई की जाए तो "बिना खर्ची, बिना पर्ची" नौकरी (Job) मिलना संभव है।

गांव की नई पहचान और नशे से दूरी

रिसालियाखेड़ा गांव के युवा न केवल अपनी पढ़ाई और मेहनत के बल पर नौकरी पाने में सफल रहे हैं बल्कि वे नशे (Drug Free) से भी दूर हैं। गांव में बनी गौशाला (Gaushala) में सेवा करने और पढ़ाई के प्रति समर्पण ने उन्हें यह सफलता दिलाई है। इससे गांव के युवाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश गया है कि मेहनत और योग्यता ही सच्ची सफलता की कुंजी है।