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ट्रेन में स्टेयरिंग तो होता नही फिर ट्रेन कैसे चलाता है पायलट, ट्रेन चलने के बाद लोको पायलट को करने पड़ते है ये काम

भारतीय रेलवे जो दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है भारत की धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। रोजाना लाखों लोग इसमे यात्रा करते हैं। रेलवे के इस विशाल नेटवर्क को चलाने में लोको पायलट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
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भारतीय रेलवे जो दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है भारत की धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। रोजाना लाखों लोग इसमे यात्रा करते हैं। रेलवे के इस विशाल नेटवर्क को चलाने में लोको पायलट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आइए जानते हैं इस आर्टिकल में लोको पायलट के काम और उनकी जिम्मेदारियों के बारे में।

लोको पायलट की जिम्मेदारियां

लोको पायलट जिसे आमतौर पर ट्रेन ड्राइवर कहा जाता है ट्रेन के संचालन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं

सिग्नल और स्पीड मैनेजमेंट: लोको पायलट का प्रमुख कार्य सिग्नलों के अनुसार ट्रेन की गति को नियंत्रित करना है। उन्हें पटरी के किनारे लगे संकेतों और सिग्नलों का सख्ती से पालन करना पड़ता है।

आपात स्थितियों का सामना: लोको पायलट को कई बार आपातकालीन स्थितियों में जल्दी और सही निर्णय लेने होते हैं। इसमें ट्रेन को अचानक रोकना या किसी दुर्घटना की स्थिति में सही कदम उठाना शामिल है।

पटरी बदलने की जिम्मेदारी नहीं: लोको पायलट का काम पटरियों को बदलना नहीं है। पटरी बदलने का काम अलग कर्मचारियों, जिन्हें पॉइंट्समैन कहा जाता है, द्वारा किया जाता है।

गार्ड के साथ संवाद: लोको पायलट को ट्रेन के गार्ड के साथ संवाद करके ट्रेन की स्थिति और उसके संचालन के बारे में सूचनाएं आदान-प्रदान करनी होती हैं।

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लोको पायलट

लोको पायलट रेलवे के असली हीरो होते हैं। उनकी दक्षता, सावधानी और समर्पण भारतीय रेलवे के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करती है। वे न केवल ट्रेन को सही दिशा में ले जाने की जिम्मेदारी उठाते हैं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सहजता को भी प्राथमिकता देते हैं। उनका काम बेहद महत्वपूर्ण है और इसे अक्सर उचित मान्यता नहीं मिल पाती है।