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पूरी जिंदगी में केवल शादी के दिन ही नहाती है ये लड़कियां, शरीर की बदबू को रोकने के लिए करती है ये काम

भारतीय समाज में जहां आधुनिकता की लहरें अपना रंग दिखा रही हैं, वहीं दुनिया के कुछ कोनों में अभी भी प्राचीन परंपराएँ और संस्कृतियाँ जीवित हैं।
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भारतीय समाज में जहां आधुनिकता की लहरें अपना रंग दिखा रही हैं, वहीं दुनिया के कुछ कोनों में अभी भी प्राचीन परंपराएँ और संस्कृतियाँ जीवित हैं। ऐसी ही एक अनोखी संस्कृति नामीबिया के जंगलों में निवास करती है जिसे हिम्बा जनजाति के नाम से जाना जाता है।

जीवनशैली की एक झलक

हिम्बा जनजाति जो खुद को नामीबिया की लाल मिट्टी से सजाती है एक ऐसी जनजाति है जिसकी संस्कृति और परंपराएं आधुनिकता से कोसों दूर हैं। ये लोग मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर रहते हैं और सादगी भरा जीवन जीते हैं।

हिम्बा महिलाएँ

हिम्बा समाज में महिलाओं का विशेष स्थान है। ये महिलाएँ न केवल घर और परिवार की देखभाल करती हैं बल्कि समाज की सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ाती हैं। उनकी लाल रंग की त्वचा, जो लाल मिट्टी और जानवरों की चर्बी से बने लेप का परिणाम है उनकी पहचान और गर्व का प्रतीक है।

शादी और सामाजिक प्रथाएँ

हिम्बा जनजाति में विवाह की परंपराएँ भी अनोखी हैं। यहाँ महिलाएँ कम उम्र में ही विवाह के बंधन में बंध जाती हैं और पुरुषों को एक से अधिक विवाह करने की इजाजत होती है। इस समाज में पुरुष बाहर के कामकाज संभालते हैं जबकि महिलाएँ घर और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाती हैं।

स्वास्थ्य और सौंदर्य

हिम्बा लोग अपनी स्वास्थ्य और सौंदर्य परंपराओं में भी अनोखी हैं। वे लाल मिट्टी के लेप को अपने शरीर पर लगाते हैं जो उन्हें सूरज की कठोर किरणों और इंफेक्शन से बचाता है। इस लेप को वे सुंदरता का प्रतीक भी मानते हैं।