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भारत में इस जगह है पानी में तैरने वाला सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट, पानी का लेवल बढ़ने के बाद भी नही डूबता

सोलर पावर प्लांट्स आधुनिक ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्त्रोत बन चुके हैं। भारत समेत विश्व के अनेक देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सोलर पावर का उपयोग कर रहे हैं।
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सोलर पावर प्लांट्स आधुनिक ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्त्रोत बन चुके हैं। भारत समेत विश्व के अनेक देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सोलर पावर का उपयोग कर रहे हैं। परंपरागत रूप से, सोलर पैनल्स को घरों की छतों और खुले मैदानों में लगाया जाता है लेकिन तकनीकी विकास के साथ ही अब पानी पर तैरने वाले सोलर प्लांट्स का चलन बढ़ रहा है।

ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर प्लांट का विकास

भारत के ओंकारेश्वर बांध के बैकवाटर में स्थापित किया जा रहा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट इस नई तकनीक का एक खास उदाहरण है। इस परियोजना का पहला चरण पहले ही तीन कंपनियों के साथ 300 मेगावाट की क्षमता के लिए अनुबंधित किया जा चुका है। आने वाले समय में इस प्लांट से 600 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा जिससे 12 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। यह पर्यावरण के लिए एक बड़ा कदम है जो लगभग 1.52 करोड़ पेड़ों के बराबर है।

परियोजना की तकनीकी विशेषताएं

ओंकारेश्वर परियोजना के अंतर्गत 88 मेगावाट के लिए 207 हेक्टेयर क्षेत्र में दो लाख तेरह हजार चार सौ पचास फ्लोटिंग सोलर पैनल्स लगाए जाने हैं। इस परियोजना की लागत करीब 3,000 करोड़ रुपए है और यह 2,000 हेक्टेयर जल क्षेत्र में फैली हुई है। ये पैनल्स पानी की सतह पर तैरते हैं और जल स्तर में उतार-चढ़ाव के अनुसार खुद को संतुलित कर लेते हैं जिससे तेज लहरों और बाढ़ का प्रभाव भी इन पर नहीं पड़ता।

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