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Wine Beer: अब बिना MRP के ही बिकेगी मदिरा और बीयर की बोतल, नई शराब नीति में सरकार ने किया बदलाव

वित्त वर्ष 2024 की शुरुआत से शराब और बीयर की बिक्री में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। अब तक जहाँ शराब की बोतलों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) अंकित होता था, वहीं नई नीति के अनुसार इसे न्यूनतम...
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mandi state new liquor policy
   

वित्त वर्ष 2024 की शुरुआत से शराब और बीयर की बिक्री में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। अब तक जहाँ शराब की बोतलों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) अंकित होता था, वहीं नई नीति के अनुसार इसे न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) से बदल दिया जाएगा। इसका मतलब है कि ग्राहकों को एमएसपी से अधिक दाम पर शराब और बीयर खरीदनी पड़ेगी।

शिकायतों के बाद आया बदलाव

सरकार ने ढेरों शिकायतों के बाद एमआरपी को खत्म करने का निर्णय लिया। इससे शराब के ठेकों पर सेल्जमैन और ग्राहकों के बीच होने वाले विवादों पर रोक लगेगी। इसके साथ ही सेल्जमैन शराब ठेकेदारों को चूना नहीं लगा पाएंगे। बीयर और अंग्रेजी या देसी शराब के दाम अब ठेकेदार तय करेंगे।

अंग्रेजी शराब के लिए कोटा सिस्टम समाप्त

नई पालिसी में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी है कि अंग्रेजी शराब के लिए कोटा सिस्टम को समाप्त कर दिया गया है। पहले ठेकेदारों का न्यूनतम और अधिकतम कोटा तय होता था, लेकिन अब ठेकेदार जितना चाहें उतना कोटा ले सकते हैं। इसके साथ ही न्यूनतम कोटा उठाने पर पेनल्टी नहीं लगेगी।

देसी शराब के लिए नए नियम

देसी शराब का कोटा अब यूनिट स्तर पर तय किया गया है, जो पहले एक एक ठेके के लिए अलग अलग तय होता था। यदि एक ठेके पर देसी शराब कम बिकती है, तो ठेकेदार अपने दूसरे ठेके पर स्टाक बेच सकते हैं।

ग्राहकों को देना होगा प्राकृतिक खेती सेस

एक नई पहल के तहत ग्राहकों को अब अंग्रेजी और देसी शराब पर प्राकृतिक खेती सेस देना होगा। यह सेस देसी शराब की बोतल पर दो रुपये और अंग्रेजी शराब की बोतल पर पांच रुपये तय किया गया है, जबकि बीयर को इस सेस से मुक्त रखा गया है। सरकार ने देसी,अंग्रेजी और बीयर का न्यूनतम विक्रय मूल्य भी तय कर दिए हैं।

आबकारी विभाग मंडी एवं राज्य कर उप आयुक्त मनोज डोगरा शराब और बीयर की बोतल पर अब एमआरपी नहीं बल्कि एमएसपी अंकित होगा। सरकार ने नई शराब नीति में यह बदलाव किया है। यह व्यवस्था पहली अप्रैल से प्रदेश भर में लागू होगी।